बिक्रमजीत सिंह
हरिद्वार, 14 अगस्त (नील धारा) कनखल स्थित मृत्युंजय मठ में श्री गोरखनाथ अलख अखाड़ा (रजि.) का 14वां महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक समारोह श्रद्धा, आस्था और संत परंपरा की गरिमा के बीच भव्य रूप से संपन्न हुआ। समारोह में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं ने भाग लिया।समारोह के दौरान दीपेंद्र नाथ ‘दीपक’ जी महाराज (जम्मू), विजय लक्ष्मी मोनिका महाराज (चंडीगढ़), अंजू महाराज (दिल्ली) एवं दीपांशु महाराज (अंबाला) को महामंडलेश्वर की उपाधि से विभूषित किया गया। संत समाज ने नव नियुक्त महामंडलेश्वरों को आशीर्वाद देते हुए सनातन धर्म, संत परंपरा एवं समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।अखाड़े के अध्यक्ष श्री संजीवन नाथ जी महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर पट्टाभिषेक महज पदवी प्रदान करने का अवसर नहीं, बल्कि संत परंपरा की जिम्मेदारियों को आगे बढ़ाने का संकल्प है।

अखाड़ा सनातन संस्कृति, धर्म और मानव सेवा के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।महामंडलेश्वर हर्षिता जी महाराज ने कहा कि संत परंपरा का उद्देश्य समाज को आध्यात्मिक मार्गदर्शन देना और सनातन संस्कृति की रक्षा करना है। नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना आज समय की आवश्यकता है।महामंडलेश्वर श्री कृष्ण जी महाराज ने कहा कि संतों का जीवन त्याग, तपस्या और लोककल्याण के लिए समर्पित होता है। अखाड़े की परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए समाज में सेवा, सद्भाव और धर्म के संदेश को मजबूत किया जाएगा।महामंडलेश्वर महंत डॉ. जोगेंद्र नाथ जी महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर की उपाधि के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है। संत समाज को एकजुट होकर सनातन परंपराओं के संरक्षण के साथ राष्ट्रहित एवं लोककल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाना चाहिए।समारोह की मुख्य अतिथि श्री चेतना गिरी महाराज ने नव नियुक्त महामंडलेश्वरों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संतों का आशीर्वाद और मार्गदर्शन समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहा है। ऐसे धार्मिक एवं आध्यात्मिक आयोजन सनातन संस्कृति की जड़ों को और मजबूत करते हैं।समारोह में महामंडलेश्वर हर्षिता महाराज, महामंडलेश्वर श्री कृष्ण जी महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महात्मा एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। मंत्रोच्चार, संतों के आशीर्वचन और आध्यात्मिक वातावरण के बीच समारोह का समापन हुआ।





