रिपोर्ट आशीष सैनी
रुड़की।(नील धारा) हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में रविवार, 13 सितंबर 2026 को हिंदी भाषा, साहित्य और राष्ट्रचेतना को समर्पित रुड़की में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन मां हिंदी के महान सपूत, राष्ट्रप्रेम एवं राष्ट्रचेतना के आदित्य स्वर युगकवि डॉ. उर्मिलेश शंखधार जी की 75वीं जन्म जयंती के अमृत वर्ष के अवसर पर किया गया।
कवि सम्मेलन में देशभक्ति, राष्ट्रचेतना, सामाजिक सरोकार, हास्य-व्यंग्य एवं साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं को भाव-विभोर कर दिया। कवियों की ओजपूर्ण प्रस्तुतियों पर सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
कार्यक्रम में प्रमुख रूप से डॉ. विजेंद्र पाल शर्मा, डॉ. आर.पी. सारस्वत, डॉ. मधुराका सक्सेना, श्री वंश भारद्वाज, श्री रामकुमार चौहान एवं विराट हिंदुस्तानी ने अपनी काव्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं का मन मोह लिया।
कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन श्री किसलय क्रांतिकारी ने किया। अपनी सशक्त मंचीय शैली और साहित्यिक प्रस्तुति से उन्होंने पूरे कार्यक्रम को जीवंत बनाए रखा।

कार्यक्रम के आयोजक डॉ. विनय प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि भारत की संस्कृति, संस्कार, संवेदना और राष्ट्रीय चेतना की पहचान है। ऐसे साहित्यिक आयोजन नई पीढ़ी को हिंदी साहित्य और राष्ट्रभक्ति की गौरवशाली परंपरा से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
वक्ताओं ने कहा कि युगकवि डॉ. उर्मिलेश शंखधार ने अपनी रचनाधर्मिता के माध्यम से राष्ट्रप्रेम, जनचेतना और सामाजिक सरोकारों को प्रभावशाली स्वर प्रदान किया। उनकी 75वीं जन्म जयंती का अमृत वर्ष साहित्य जगत के लिए उन्हें स्मरण करने और उनके साहित्यिक योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
कवि सम्मेलन में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से “राष्ट्र प्रथम”, भारतीय संस्कृति, मातृभूमि के गौरव और हिंदी भाषा के सम्मान का संदेश दिया।
कार्यक्रम के अंत में आयोजक डॉ. विनय प्रताप सिंह ने सभी अतिथियों, कवियों, साहित्यकारों एवं उपस्थित श्रोताओं का आभार व्यक्त किया तथा हिंदी के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।





